जीजीआईसी बना भ्रष्टाचार का अड्डा! वाइस प्रिंसिपल और बाबू पर मिड-डे मील से लेकर पेड़ बेचने तक के गंभीर आरोप, जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से की बर्खास्तगी की मांग

संवाददाता लोकतंत्र एक्सप्रेस
बरेली। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, बरेली में शिक्षा के मंदिर को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है। प्रभारी प्रधानाचार्या श्रीमती अनु पाराशरी और वरिष्ठ सहायक विकास यादव पर भारी भ्रष्टाचार करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
मामले की शिकायत मिनिस्ट्रीयल ऑफिसर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र पाल सिंह के द्वारा संयुक्त शिक्षा निदेशक, बरेली मंडल तथा मुख्यमंत्री से की गई है। दिनांक 25/08/26 का ये शिकायती पत्र अब वायरल हो रहा है। शिकायती पत्र के माध्यम से लोक सेवा आयोग और खेलकूद की परीक्षाओं में प्राइवेट कर्मचारियों को लगाकर उनके नाम के आगे ‘परिचारक’ लिखकर सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करने, छात्राओं के निवाले पर डाका डालते हुए मिड-डे मील में भारी घोटाले करने, विद्यालय के अंदर खड़े पुराने कीमती वृक्ष, लोहा और विभाग की खंडित बस को बिना नीलामी के रात में बेचने , सामग्री क्रय में फर्जी बिल लगाकर सरकारी धन की लूट करने, संचायिका में जमा बच्चों की धनराशि जो TC वितरण के समय बच्चों को दी जाती है, उसमें भी भारी भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाये गये है।
पीड़ित कर्मचारी भूपेन्द्र पाल सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि 2022 में विभाग ने उनका ट्रांसफर जीजीआईसी में किया गया था, लेकिन जुलाई 2022 से जुलाई 2026 तक 4 साल तक उन्हें विधालय में कोई सरकारी काम ही नहीं दिया गया। जब उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत की बात कही तब जाकर काम दिया गया। पीड़ित ने गंभीर आरोप लगाते हुए जातिसूचक गाली-गलौज करने की बात कही है । शिकायतकर्ता का आरोप है कि दिनांक 20-08-2026 को दोपहर 12 बजे अनु पारासरी तथा विकास यादव ने विद्यालय परिसर में उनकी जाति को लेकर अपमानित किया पूर्वता मे भी ऐसे ही एक प्रकरण को लेकर वह एक साल पहले भी अपने अधिवक्ता के माध्यम इनको नोटिस दे चुके हैं।
जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह माननीय न्यायालय की शरण लेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और विधालय की होगी।
इस पूरे मामले पर प्रधानाचार्य डॉ नीतू सक्सेना ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अनु पारासरी तथा विकास यादव के ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं। विभाग द्वारा प्रमोशन के संबंध में सीआर आख्या मांगी गई है, इसी प्रक्रिया को प्रभावित करने और अपनी नकारात्मक गतिविधियों को छुपाने के लिए साजिश के तहत शिकायतकर्ता के द्वारा यह झूठी शिकायत कर मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं। सभी प्रक्रिया शासनादेश के नियमानुसार की गयी है जांच में सभी कुछ स्पष्ट हो जायेगा।




