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सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर बेरोजगारों को बनाया शिकार,एक हफ्ते में 10 से ज्यादा मुकदमे दर्ज

फर्जी IAS गैंग का बड़ा खुलासा, ड्राइवर और पिता भी निकले ठगी के मास्टरमाइंड,

संवाददाता लोकतंत्र एक्सप्रेस 

 

बरेली। शहर के बारादरी क्षेत्र में रहने वाली कथित फर्जी आईएएस अधिकारी विप्रा शर्मा और उसकी बहनों के खिलाफ ठगी के मामलों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ऐंठने वाले इस गिरोह में अब ड्राइवर विनोद उर्फ बबलू और पिता वीरेंद्र शर्मा की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस ने नौ नयी एफआईआर दर्ज की हैं, जिसके बाद एक सप्ताह में दर्ज मुकदमों की संख्या 10 से अधिक पहुंच गई है। कई शिकायतें अभी जांच में भी बताई गयी हैं। पुलिस के अनुसार गिरोह बेरोजगार युवाओं को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। खुद को प्रशासनिक अधिकारी बताकर विश्वास जमाया जाता और फिर फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर रकम हड़प ली जाती थी।

लग्जरी कार, गनर और ड्राइवर के दम पर रचा गया फर्जी अफसर का खेल,करोड़ों का लगाया चूना

पुलिस जांच में सामने आया है कि विप्रा शर्मा खुद को एसडीएम और उच्च प्रशासनिक अधिकारी बताकर लग्जरी कार में घूमती थी। उसके साथ ड्राइवर और कथित गनर भी रहते थे, जिससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे। इसीक्रम में जगतपुर निवासी ठेकेदार कफील ने बारादरी थाने में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2021 में विप्रा शर्मा ने खुद को एसडीएम बताया और सरकारी नौकरी लगवाने के बदले 5.25 लाख रुपये ले लिए। बाद में बदायूं के इस्लामनगर ब्लॉक में सहायक विकास अधिकारी का फर्जी नियुक्ति पत्र भेजा गया। जांच में पता चला कि ऐसा कोई पद ही मौजूद नहीं था। तो वही अग्रसेन नगर निवासी कश्मीर सिंह ने आरोप लगाया कि विप्रा ने उन्हें और उनके भाई दिग्विजय को सरकारी नौकरी दिलाने का सपना दिखाया। दोनों से कुल 8.65 लाख रुपये लिए गए और शाहजहांपुर के तिलहर ब्लॉक का फर्जी नियुक्ति पत्र भेज दिया गया। वहां पहुंचने पर पूरा मामला फर्जी निकला।

लेखपाल के नाम पर 13.50 तो विकास भवन में नौकरी दिलाने के नाम पर साढ़े सात लाख ठगे

शीशगढ़ क्षेत्र के भैंसिया गांव निवासी अंकित ने पुलिस को बताया कि विप्रा और उसकी बहन शिखा ने विकास भवन में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उससे 7.5 लाख रुपये ले लिए। बाद में शाहजहांपुर के तिलहर ब्लॉक का फर्जी नियुक्ति पत्र दिया गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। तो वही भोजीपुरा के सैदपुर सरौरा निवासी सुरेंद्र पाल ने बताया कि यूनिवर्सिटी में उसकी मुलाकात शिखा से हुई थी। शिखा ने अपनी बहन विप्रा को एसडीएम बताकर मिलवाया। वहां पिता वीरेंद्र शर्मा भी मौजूद था। तीनों ने लेखपाल की नौकरी दिलाने का भरोसा देकर 13.50 लाख रुपये ले लिए और बाद में बदायूं सदर तहसील का फर्जी नियुक्ति पत्र भेज दिया।

सेवानिवृत्त अभियंता पिता  तथा ड्राइवर भी नेटवर्क में शामिल  

जांच में यह भी सामने आया है कि विप्रा का पिता वीरेंद्र शर्मा, जो सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अभियंता बताया जा रहा है, ठगी के नेटवर्क में सक्रिय था।देवरनियां निवासी अर्जुन ने बताया कि यूनिवर्सिटी में शिखा से मुलाकात के बाद उसे ग्रीन पार्क स्थित घर बुलाया गया, जहां विप्रा और वीरेंद्र शर्मा भी मौजूद था। तीनों ने क्लर्क की नौकरी लगवाने के नाम पर सात लाख रुपये ले लिए और बदायूं दातागंज ब्लॉक का फर्जी नियुक्ति पत्र भेज दिया।

नेकपुर निवासी प्रशांत ने आरोप लगाया कि विप्रा और शिखा ने उससे सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये ठग लिए। इसी तरह बदायूं निवासी श्रीराम गंगवार से डेढ़ लाख रुपये और गंगानगर कॉलोनी निवासी हिमांशु पाल से चार लाख रुपये ठगे जाने की शिकायत दर्ज हुई है।

गिरोह का ड्राइवर विनोद उर्फ बबलू भी बेहद चालाक निकला। पीलीभीत के बीसलपुर निवासी राजकुमार ने बताया कि विनोद ने अपने बेटे विशाल की सरकारी नौकरी लगने की खुशी में कॉलोनी में मिठाई बांटी थी और इसका श्रेय विप्रा शर्मा को दिया था। इसी बात पर भरोसा कर राजकुमार ने खेती की जमीन, पत्नी के गहने बेचकर और उधार लेकर कुल आठ लाख रुपये विनोद को दे दिए। बाद में पंचायती राज विभाग लखनऊ का फर्जी नियुक्ति पत्र भेजा गया, जिस पर विशेष सचिव के नकली हस्ताक्षर पाए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह लंबे समय से बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा था। कई लोग रुपये वापस मिलने की उम्मीद में शिकायत दर्ज नहीं करा रहे थे। अब लगातार पीड़ित सामने आ रहे हैं।

एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि फर्जी तरीके से खुद को प्रशासनिक अधिकारी बताकर लोगों से ठगी की गई है। गिरोह के सभी सदस्यों की भूमिका की जांच की जा रही है और संपत्तियां भी चिह्नित की जा रही हैं। पूरे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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