Welcome to लोकतंत्र एक्सप्रेस   Click to listen highlighted text! Welcome to लोकतंत्र एक्सप्रेस
क्राइमटॉप न्यूज़ठगीबरेलीयूपी

फर्जी IAS विप्रा शर्मा और उसकी बहनों के सलाखों के पीछे पहुंचते ही खुलने लगे काले कारनामे, शिकायतो का लगा अंवार, नौकरी के नाम पर 9.80 लाख की ठगी

 

संवाददाता लोकतंत्र एक्सप्रेस 

 

बरेली। जनपद‌ में फर्जी IAS विप्रा शर्मा और उसकी बहनों के सलाखों के पीछे पहुंचते ही, अब उनके काले कारनामों की परतें दर वदर खुलने लगी हैं। रसूख और नीली बत्ती के खौफ से जो लोग अब तक खामोश थे, वे अब थाने में पहुँच कर उनकी असलियत सामने ला रहे है जिसके कारण थाना बारादरी में शिकायतों का अंबार लग रहा हैं। नौकरी पाने की ललक में किसी ने अपनी पुश्तैनी जमीन, घर बेचा, तो किसी ने घर चलाने का एकमात्र सहारा ‘ऑटो’ बेचकर ही फर्जी IAS बनी विप्रा को लाखों रुपये सौंप दिए। ठगी का जाल ऐसा कि आरोपियों ने पीड़ितों को बाकायदा फर्जी जॉइनिंग लेटर तक थमा दिए। नौकरी के नाम पर किसी से 7 लाख, तो किसी से 3 लाख की वसूली की गई।

तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि ये तीनों बहनें मिलकर एक ‘क्राइम सिंडिकेट’ चला रही थीं, जहाँ फर्जी अफसर बनकर लोगों की गाढ़ी कमाई को लूटा जा रहा था। पुलिस अब विप्रा के बैंक खातों और उसकी बेनामी संपत्तियों की कुंडली खंगाल रही है।।

 

डोहरा रोड स्थित सनराइज कॉलोनी निवासी अमित कुमार राय ने बताया कि मेरी मुलाकात खुद को एसडीएम (एफआर) बताने वाली विप्रा शर्मा से हुई थी। विप्रा और उसके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा ने अमित को झांसा दिया कि खंड विकास कार्यालय (ब्लॉक) में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्तियां होनी हैं।

सरकारी पद का लालच देकर 12 जून 2025 को आरोपियों ने अमित से 20 हजार रुपये ऑनलाइन और 2 लाख 60 हजार रुपये नकद ले लिए। जब नियुक्ति में देरी होने लगी और अमित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो उसे भी एक फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया गया। अमित के साथ मौजूद एक विश्वविद्यालय कर्मी ने जब उस पत्र की जांच की, तो पता चला कि वह पूरी तरह जाली है। हैरानी की बात यह है कि जब पीड़ित अपने पैसे वापस मांगने ग्रीन पार्क स्थित विप्रा के घर पहुंचा, तो वहां मौजूद पिता-पुत्री ने उसे जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। अमित ने अब बारादरी पुलिस से इस दबंग परिवार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही और अपनी गाढ़ी कमाई वापस दिलाने की मांग की है। तो वही दूसरा मामला जोगी नवादा से प्रकाश मे आया है वहां सेनानी कॉलोनी निवासी विनोद कुमार ने इस फर्जीवाड़े का शिकार होने की व्यथा सुनाई । और बताया कि मुझे मेरे एक परिचित ड्राइवर ने फर्जी IAS महिला विप्रा शर्मा से मिलवाया था, जिसने खुद को एसडीएम बताया था। विनोद इस झांसे में ऐसा फंसा कि उसने महिला के साथ तीन महीने तक ड्राइवर के तौर पर ड्यूटी भी की।

इस दौरान विप्रा ने उसे सरकारी विभाग में स्थायी ड्राइवर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बदले में 7 लाख रुपये की मांग की गई। गरीब विनोद ने सरकारी नौकरी के सपने को सच करने के लिए अपनी जमीन और घर चलाने का इकलौता सहारा ‘ऑटो’ तक बेच दिया और रकम जुटाकर विप्रा, उसकी बहन शिखा और दीक्षा पाठक को सौंप दी। ठगी की हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने विनोद के विश्वास को बनाए रखने के लिए स्पीड पोस्ट के जरिए एक फर्जी जॉइनिंग लेटर भी भिजवा दिया। काफी समय बीतने के बाद भी जब जॉइनिंग नहीं हुई, तब विनोद को ठगी का अहसास हुआ। विनोद के पास इस लेनदेन और बातचीत की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसे लेकर उसने अब रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार लगाई है।

बताते चले कि यह पूरा ठगी का खेल प्रीति लॉयल की शिकायत पर खुला है फाईक एन्क्लेव की रहने वाली प्रीति लॉयल ने पुलिस को बताया था कि उसकी मुलाकात दीक्षा पाठक नाम की महिला से हुई थी। दीक्षा ने जाल बिछाते हुए प्रीति को विश्वास दिलाया कि उसकी बहन डॉ. विप्रा शर्मा एक बड़ी अधिकारी है और एडीएम के पद पर तैनात है। दीक्षा ने दावा किया कि उसकी बहन की ऊंची पहुंच है और वह पैसे के बदले किसी को भी सरकारी नौकरी दिलवा सकती है। इस झांसे में आकर प्रीति के साथ-साथ उसके परिचित आदिल खान, संतोष कुमार और मुशाहिद अली भी नौकरी की उम्मीद में इस जाल में फंस गए। आरोपियों ने पीड़ितों को अपने घर बुलाकर उनका भरोसा जीता। जब ये लोग विप्रा शर्मा और शिखा के घर पहुंचे, तो वहां उनके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा भी मौजूद थे। विप्रा शर्मा ने खुद को IAS अधिकारी बताते हुए कहा कि कंप्यूटर ऑपरेटर के पदों पर भर्ती निकली है और वह बड़े अधिकारियों को पैसा देकर उनकी नियुक्ति करवा देगी। इसके बाद पैसों के लेन-देन का सिलसिला शुरू हुआ। प्रीति ने दो लाख रुपये बैंक खाते में जमा किए, जबकि आदिल खान ने एक लाख अस्सी हजार रुपये दिए। मुशाहिद अली ने पांच लाख इक्कीस हजार रुपये की बड़ी रकम आरोपियों के घर जाकर नकद थमा दी। वहीं संतोष कुमार ने भी दो लाख रुपये का भुगतान कर दिया । ठगी की पराकाष्ठा तब हुई जब आरोपियों ने पीड़ितों को फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए। विप्रा शर्मा ने राजस्व परिषद लखनऊ के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन पर तत्कालीन उच्च अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर भी कर दिए। ये नियुक्ति पत्र डाक, व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए पीड़ितों को भेजे गए। जब ये लोग जॉइनिंग के लिए लखनऊ पहुंचे, तो वहां के अधिकारियों ने बताया कि ये सभी नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी हैं। इस खुलासे के बाद पीड़ितों के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्हें समझ आया कि वे एक बड़े गिरोह का शिकार हो चुके हैं।

 

सामान्य परिवार की बेटियों ने बनाया ‘क्राइम सिंडिकेट’ 

 

विप्रा के पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा के सामने ही यह पूरा खेल चल रहा था। एक साधारण परिवार की इन बेटियों ने मिलकर एक ऐसा ‘क्राइम सिंडिकेट’ बनाया जिसमें काम बाटा हुआ था। दीक्षा शिकार ढूंढती थी, शिखा माहौल बनाती थी और विप्रा फर्जी अधिकारी बनकर ‘फाइनल डील’ करती थी। इनके पास से बरामद महिंद्रा XUV 700 और आईफोन इनके इसी आलीशान जीवन की गवाही दे रहे हैं, जो इन्होंने दूसरों की गाढ़ी कमाई लूटकर बनाई थी।

पुलिस के मुताबिक, विप्रा शर्मा की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 2016 में पीसीएस प्री क्वालीफाई करने के बाद उसकी शादी हुई, लेकिन 2020 में तलाक हो गया। अकेलेपन और नाकामयाबी ने उसे इतना कुंठित कर दिया कि उसने फर्जी एडीएम बनने का नाटक शुरू किया। वह बाकायदा गाड़ी पर नीली बत्ती और उत्तर प्रदेश शासन की प्लेट लगाकर चलती थी। विप्रा शर्मा पुत्री वीरेंद्र कुमार शर्मा निवासी ग्रेटर ग्रीन पार्क थाना बारादरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 35 वर्षीय विप्रा शर्मा ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने प्रयागराज में सिविल सर्विसेज की तैयारी की थी। उसने पुलिस को बताया कि पीसीएस प्री में उसका चयन भी हो गया था। इस बीच उसे वहीं से पता चला कि IAS का कितना रुतबा होता है। अधिकारियों की कार्यशैली को उसने नजदीक से समझा और उसके बाद वह यह हजम नहीं कर सकी कि वह खुद IAS नहीं बन सकी। उसने पहले एक ब्लैक कलर की कार ली, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार और एसडीएम लिखवाया। उसके बाद उसने एक XUV कार ली जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के साथ-साथ एडीएम एफआर लिखवाया। इसके बाद वह पूरे रुतबे के साथ रहने लगी और लोगों को लगा कि वह वाकई एक IAS अफसर है।

 

नीली बत्ती और एडीएम की प्लेट वाली गाड़ी से रौब जांच में यह भी सामने आया है कि विप्रा शर्मा पूरी तरह फिल्मी अंदाज में अपना रसूख दिखाती थी। वह अपनी गाड़ी पर एडीएम एफआर उत्तर प्रदेश शासन की प्लेट लगाकर घूमती थी ताकि किसी को शक न हो। जब पीड़ितों ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने उन्हें धमकी दी और पैसा लौटाने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ितों ने हिम्मत जुटाकर बारादरी पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

 

इंस्पेक्टर बारादरी विजेंद्र सिंह ने बताया कि आज दो लोगों की तहरीर आई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि विप्रा शर्मा ने फर्जी IAS बनकर नौकरी दिलाने के नाम पर रुपए ठगे है। मामले की जांच कर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

 

 

एएसपी/सीओ सिटी पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि बारादरी थाना पुलिस ने फर्जी IAS और उसकी दो बहनों को गिरफ्तार किया है। ये लोग सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करते थे। पुलिस ने उनके पास से 4.50 लाख कैश, बैंक में जमा 55 लाख रुपये, 10 चेक बुक, 4 मोबाइल (जिनमें 2 आईफोन और दो वीवो कंपनी के फोन हैं), घटना में प्रयुक्त सफेद रंग की महिंद्रा XUV 700 कार, 2 लैपटॉप और 3 पासबुक बरामद की हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस फर्जी आईएएस ने शहर में और कितने लोगों को अपना निशाना बनाया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!