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लाईलाज बीमारियों का मुख्य आधार बनी रामपुर डिसलरी, कैमिकल जल वना जहर, एलर्जी, लीवर सहित कैंसर जैसी हो रही गंभीर बीमारियां

कैमिकल‌ के कारण 150 से 200 फिट गहराई का भी पानी हो गया प्रदुषित,बच्चों एवं‌ बुजुर्ग पर कैमिकल का पड रहा बुरा प्रभाव

संवाददाता लोकतंत्र एक्सप्रेस 

 

रामपुर। जनपद मे बरेली रोड स्थित रामपुर डिसलरी लोगो को जहां रोजगार मुहैया करा रही थी। लेकिन अव वह क्षेत्र वासियों के लिए एक अभिशाप साबित हो रही है इससे निकले वाला बदबूदार कैमिकल वाला प्रदुषित पानी एक जहर के रूप मे लोगो के जीवन को प्रभावित कर रहा है।तथा निरंतर उनको मौत के करीब‌ ढकेल रहा है। यह कैमिकल नुमा जहर लोगों के स्वास्थ्य के साथ ही नहीं बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को भी खोखला बना रहा है। सूत्रों से ज्ञात हुआ कि रामपुर डिसलरी जनपद मे लगभग दो तीन दसक पूर्व लगाई गयी थी और जो लोगो को रोजगार का भी साधन बन गयी। मगर इससे निकलने वाला कैमिकल नुमा प्रदुषित पानी नाले के रास्ते शाहबाद रोड से होते हुए कोसी रामगंगा मे समाहित कर दिया गया है। डिसलरी से कोसी रामगंगा की यह दूरी लगभग 25 से 30 किलोमीटर है इस दूरी के अंतर्गत कम से कम 20 से 25 ग्राम पंचायते आती है जिसमे हजारो की संख्या मे ग्रामीण निवास करते है ।डिसलरी से निकलने वाला बदबूदार जहरनुमा कैमिकल के कारण इन सभी गाँवो का पानी पूर्णतः प्रदूषित हो गया है यहां पर लगभग 150 से 200 फिट नीचे का भी पानी प्रदुषित हो गया है और ग्रामीण मजबूरन इस प्रदुषित पानी पीने को मजबूर है। जिसके कारण इन ग्रामों के लोग एलर्जी, किडनी, लिवर ,हार्ट , पीलिया, दाद,खुजली सहित कैंसर जैसी गंभीर लाईलाज गंभीर बीमारियों से जूझ रहे है।

 

यह कैमिकल बच्चों व बुजुर्गों पर अपना विशेष प्रभाव डाल रहा है जिससे आने वाले समय मे क्षेत्र के लोग विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों से जुझते हुए देखे जा सकते है। डिसलरी से निकलने‌ वाला कैमिकलनुमा पानी पूर्णता प्रदुषित, काला एवं‌ बदबूदार है जिसके कारण क्षेत्रों में मच्छरों की संख्या में भारी बढोतरी देखने को मिली है। हीटवेव व भीषण गर्मी के चलते ग्रामीणों को खुले मे सोने को मजबूर है और यह विषैले पानी से उत्पन्न मच्छरों के काटने से गंभीर बीमारियों के फैलने की विकट संभावना बनी हुई है ।ग्रामीणों ने बताया कि इस प्रदुषित कैमिकल से क्षेत्रवासियों के स्वास्थ्य पर तो असर पढ ही रहा है साथ ही साथ क्षेत्र वासियों के खेती किसानी,जानवरो तथा घरो की सुरक्षा पर भी बडा़ संकट बन आया है सुरक्षा मे लगाए जा रहे गेट ,जाल ,विंडो, टीन शैड आदि पर भी कैमिकल अपना प्रभाव छोड़ रहा है इस विषाक्त कैमिकल से निकलने वाली बाष्प के द्वारा जिस लोहे की गेट की उम्र कम से कम 20 बर्ष होती है वह भी सिर्फ दो से ढाई वर्ष में ही पूर्णतया जंग लगकर खत्म हो जाता है। जिससे क्षेत्रवासियों के आर्थिक स्थिति पर भी दोहरी मार पड रही है। तो वही दूसरी ओर प्रदुषित जल के कारण फसलो की पैदाबार भी निरंतर गिरती जा रही है तथा उसके गुणवत्ता मे भी भारी गिरावट देखी जा रही है। ग्रामीण परिक्षेत्र में रहने वाले किसानों का खेती के बाद मुख्य आय का स्रोत्र पशु पालन से होता है और योगी सरकार भी किसानों की आय को बढाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है जिससे किसानों को गरीबी रेखा से निकाल कर एक सम्मान एवं स्वाभिमान पूर्ण जीवन देने की बात करती है तथा पशुपालन को बढावा देते हुए किसानों को सब्सिडी देते हुए उनकी आय बडाने का कार्य कर रही है मगर डिसलरी के इस विषाक्त एवं बदबूदार जल के कारण यहां के किसानों के लिए एक बडी चुनौती बनती जा रही है। इस पानी के पीने से पशु भी बीमार पड रहे है।तो किसानों की आय में कैसे वृद्धि हो सकती है और रह बची धनराशि बीमारियों में खर्च करनी पड जा रही है।

किसान कुंवरसेन ने बताया कि इस दूषित पानी‌ के कारण रात को तो छोडो़ दिन मे भी मच्छरों का भंयकर प्रकोप है। बच्चे बुखार से पीड़ित है घर से निकलने से पहले लोशन का उपयोग करना पड रहा है।

तो वही मिलक चिकना के बब्बन ने बताया कि डिसलरी का तेजाब व कैमिकल वाला गंदा पानी आने से घर के नलो का पानी प्रदुषित हो गया है जिस कारण मुझे कैंसर जैसी प्राण घातक बीमारी हो गयी है जिसका दिल्ली के एम्स से ईलाज चल रहा है। तो वही ग्रामीण साविर ने बताया कि यह गंदा पानी बहुत ही बदबूदार है जिससे लोगो का जीना भी दूभर हो गया है इस दूषित पानी के कारण क्षेत्र मे एलर्जी ,लीवर ,पीलिया सहित तमाम बीमारियों मे भारी बढोतरी हुई है। कैमिकल वाला पानी लोहे के गलने का मुख्य कारण बन गया इसके कारण लोहे के गेट दो वर्ष मे ही गलकर खराब हो जाते है।

प्रशासन को इन गंभीर समस्याओं पर विशेष ध्यान देते हुए मौतो का मुख्य कारण बनने से पहले ही इस फैक्ट्री पर तत्काल कार्यवाही कर आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए कैमिकल युक्त पानी के निस्तारण को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए। जिससे यह भविष्य में एक महामारी का कारण न बन सके।

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