
संवाददाता लोकतंत्र एक्सप्रेस
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किन्नर समुदाय द्वारा ‘बधाई’ के नाम पर धन वसूली को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यह कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी वैधानिक आधार के किसी व्यक्ति से धन लेना अवैध माना जाएगा।
यह फैसला गोंडा की किन्नर रेखा देवी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि किन्नरों के लिए ‘बधाई वसूली’ को परंपरागत अधिकार के रूप में मान्यता दी जाए और इसके लिए क्षेत्रवार अधिकार भी तय किए जाएं, ताकि अन्य समूहों से विवाद न हो।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि केवल किसी प्रथा के लंबे समय से चले आ रहे होने से उसे कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान और कानून के तहत किसी भी प्रकार की जबरन वसूली को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
याचिका में यह भी मांग की गई थी कि किन्नरों के लिए ‘बधाई वसूली’ के क्षेत्र निर्धारित किए जाएं, जिससे अलग-अलग समूहों के बीच विवाद खत्म हो सके। कोर्ट ने इस मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि ऐसी व्यवस्था को वैध ठहराना कानून के दायरे में संभव नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि बधाई लेना कोई मौलिक या कानूनी अधिकार नहीं है
पुरानी परंपराओं के नाम पर जबरन वसूली को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि परंपरा के नाम पर किसी भी तरह की धन वसूली को कानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा। यह निर्णय कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अवैध वसूली पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।।




