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डिप्टी सीएम की नाराजगी से गिरी गाज, एसीएमओ पर बैठी उच्च स्तरीय जांच, स्वास्थ्य विभाग मे देखने को मिल सकते हैं बड़े बदलाव

संवाददाता लोकतंत्र एक्सप्रेस 

बरेली । जनपद में स्वास्थ्य विभाग के चर्चित एसीएमओ डॉ. लईक अहमद के मामले में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की नाराजगी और सख्त निर्देशों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई अमल नहीं लाये जाने के कारण मामला अब बडा़ तूल पकड़ चुका है और एसीएमओ लईक अहमद अंसारी के विरूद्ध उच्च स्तरीय जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई है, इस प्रकरण से पूरे विभाग मे हलचल पैदा हो गयी है।

बताते चले कि हाल ही में बरेली दौरे के दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के द्वारा विभागीय समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया । इसी क्रम में डॉ. लईक अहमद से जुड़े प्रकरण पर भी चर्चा हुई, जहां उनकी कार्यशैली और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल उठे। बैठक में संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि प्राप्त शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

डिप्टी सीएम के सख्त आदेश के बाद से ही विभागीय जांच-पड़ताल निजीकरण, शिकायतों का निस्तारण, फील्ड स्तर की निगरानी व्यवस्था आदि जैसे बिंदुओं को शामिल करते हुए संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है ताकि तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सके।

सूत्रों से मिली जानकारी से ज्ञात हुआ है कि अब मामला सिर्फ जिला स्तर पर नहीं रह गया है बल्कि उच्च प्रशासनिक स्तर पर जांच के दायरे में है, जहां अलग-अलग पहलुओं पर समीक्षा कर जांच की गंभीरता पर विश्लेषण किया जा रहा है।

उच्च स्तरीय जांच से महकमे की बढी़ धडकनें, किस किस पर गिरेगी गाज

 

जहां एक ओर उच्च स्तरीय जांच तेज होती नजर आ रही है, तो वहीं जिला स्तर के ढुलमुल रवैये को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि डिप्टी सीएमओ के सख्त निर्देशों के बावजूद भी कार्रवाई की रफ्तार धीमी क्यों है। महकमे की उच्च स्तरीय जांच की सुवगुहाट से महकमे की धडकनें बढ़ने लगी है। अब यह देखना बाकी है कि यह उच्च स्तरीय जांच के कारण किन किन पर गाज गिर सकती है।

 

सूत्रों का कहना है कि पूरा प्रकरण अब प्रशासनिक निगरानी में है और जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, प्रकरण से जुड़े सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और मामला जांच के अधीन है। 

वहीं डिप्टी सीएम की नाराजगी, उच्च स्तरीय जांच और जिला स्तर पर हो रही सुस्त कार्रवाई, इन सबके बीच यह मामला अब प्रशासनिक सिस्टम की एक बड़ी परीक्षा बन गया है।।

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