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खबर का असर, महिला की मौत की खबर छपते ही जागा स्वास्थ्य विभाग, 24 घंटे में महेशनाथ मेडिकेयर का आईसीयू सील

स्वास्थ्य विभाग का छापा,3 बड़े अस्पतालों में मचा हड़कंप! बेसमेंट वाले आईपीडी सील, आईसीयू पर भी पडा़ ताला

संवाददाता लोकतंत्र एक्सप्रेस 

 

बरेली। दैनिक समाचार पत्र में महिला की मौत की खबर छपते ही जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग की नींद टूट गयी। शनिवार को सीएमओ के द्वारा गठित टीम ने महेशनाथ मेडिकेयर हॉस्पिटल पर छापा मारकर महज 24 घंटे के अंदर आईसीयू को सील कर दिया। 

गत दिन महेशनाथ मेडिकेयर हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गई थी। परिजनों के द्वारा इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाना बारादरी में शिकायत की गयी थी। घटना की दैनिक समाचार पत्रो के माध्यम से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया । खबर सुर्खियों में आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।

24 घंटे में एक्शन, किया गया आईसीयू सील 

उक्त घटना की शुक्रवार को खबर प्रकाशित हुई और शनिवार को सीएमओ द्वारा गठित टीम अस्पताल पहुंच गई। टीम ने पूरे मामले को गंभीरता से देखते हुए तत्काल प्रभाव से अस्पताल का आईसीयू सील कर दिया। साथ ही महिला की मौत के प्रकरण की जांच के लिए अलग से विशेष टीम गठित कर दी गई है।। 

असर vs सवाल 

बेशक खबर का असर हुआ और 24 घंटे में आईसीयू सील हो गया, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या हर कार्रवाई के लिए किसी की मौत और अखबार की हेडलाइन जरूरी है? स्वास्थ्य विभाग का यह “तेज-तर्रार एक्शन” राहत देता है, मगर इसकी “नींद” चिंता भी। 

महेशनाथ मेडिकेयर का आईसीयू तब सील हुआ जब दैनिक अखबार में महिला की मौत की खबर छपी। यानी विभाग को अपने निरीक्षण से ज्यादा भरोसा मीडिया की खबरों पर है। यह व्यवस्था पर तमाचा है। हर मौत के बाद जांच टीम गठित करना यह समाधान नहीं, लीपापोती है।

स्वास्थ्य विभाग का छापा,3 बड़े अस्पतालों के बेसमेंट वाले आईपीडी सील, आईसीयू पर ताला

 शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर में ऐसा छापा मारा कि अस्पताल संचालकों के होश उड़ गए। सीएमओ के आदेश पर गठित तेज-तर्रार टीम ने मिनी बाईपास से लेकर शहर तक ताबड़तोड़ निरीक्षण कर कार्यवाही की गयी। निरीक्षण के दौरान मिनी बाईपास स्थित रेनबो एचसीएमसी क्लीनिक पर टीम पहुंची तो देखा बेसमेंट में चोरी-छिपे आईपीडी वार्ड चल रहा था। मरीज भर्ती मिलते ही टीम ने तुरंत बेसमेंट वाले वार्ड को सील कर दिया। तो वही मिनी बाईपास स्थित उम्मीद हॉस्पिटल में निरीक्षण में आईपीडी का कोई काम नहीं मिला। टीम ने सख्त निर्देश तथा नोटिस देते हुए अस्पताल संचालक को बेसमेंट में मरीज भर्ती नहीं करने की हिदायत दी।

 

 निरीक्षण टीम ने कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अस्पताल को बख्शा नहीं जाएगा। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

अखबार की खबर vs विभाग की नींद

स्वास्थ्य विभाग की शनिवार की कार्रवाई ने एक बार फिर शहर के अस्पतालों की कलई खोल दी है। मिनी बाईपास पर रेनबो एचसीएमसी क्लीनिक के बेसमेंट में चल रहा आईपीडी वार्ड सील हुआ, उम्मीद हॉस्पिटल को नोटिस मिला और महेशनाथ मेडिकेयर का आईसीयू तालों में बंद हो गया। सवाल यह है – क्या कार्रवाई के लिए किसी महिला की मौत और अखबार की सुर्खी का इंतजार करना जरूरी था?

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