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उर्स-ए-नूरी देश भर के उलेमा व मुरीदीन ने की शिरकत, देर रात अदा की गई कुल शरीफ की रस्म

सुन्नी खानकाहों को जोड़ने मे अहम किरदार किया अदा मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द- अहसन मियां

संवाददाता  लोकतंत्र एक्सप्रेस 

बरेली। दरगाह आला हज़रत पर आला हज़रत के छोटे साहिबजादे मुफ्ती आज़म हिंद हज़रत अल्लामा मुस्तफा रज़ा खा क़ादरी नूरी का 46 वां एक रोज़ा उर्स-ए-नूरी बड़े ही अदब-ओ-एहतिराम के साथ दरगाह परिसर में मनाया गया। बाद नमाज़-ए-फज्र कुरानख्वानी दिन में नात-ओ-मनकबत का दौर चला। देर रात एक बजकर चालीस मिनट पर मुफ्ती-ए-आज़म के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। सभी कार्यक्रम दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान(सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती,सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी(अहसन मियां) की सदारत और सय्यद आसिफ मियां की देखरेख में सम्पन्न हुए। उर्स में शिरकत के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने दरगाह पर हाज़िरी दी। गुलपोशी और फातिहाख्वानी के बाद मुल्क-ए-हिंदुस्तान व मिल्लत तरक्की,अमन व खुशहाली के लिए दुआ की। 

मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि बाद नमाज़ मगरिब हाजी गुलाम सुब्हानी ने मिलाद का नज़राना पेश किया। संचालन(निजामत) कारी यूसुफ रज़ा संभली ने किया। महफ़िल का आग़ाज़ रात 10 तिलावत-ए-कुरान से किया गया। इसके बाद मुल्क भर से आए उलेमा व शोहरा ने कलाम पेश किए। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी(अहसन मियां) ने अपने पैगाम में कहा कि खानदान-ए-आला हजरत में मुफ्ती आज़म हिन्द ने लंबी उम्र पाई। आपके पीर-ओ-मुर्शिद ने फरमाया था कि ये बच्चा दीनो मिल्लत की बड़ी खिदमत करेगा। मखलूके खुदा को इस ज़ात से बहुत फैज़ पहुंचेगा। ये बच्चा वली है इसकी निगाहों से लाखों गुमराह इंसान दीने हक पर होगे ये फैज़ का दरिया बहाएगा। यही वजह है आपके दर से दुनिया आज भी फैज़ हासिल कर रही है। आगे कहा कि आपने मुल्क भर की सुन्नी खानकाहों को एक माला में पिरोने का काम किया। वहीं दूसरी तरह सन 1947 को मुल्क में हिंदू मुस्लिम के नाम पर हुए बंटवारे के सख्त खिलाफ थे मुफ्ती ए आज़म। आपने उस वक्त पाकिस्तान जाने के बजाए मुल्क ए हिंदुस्तान में रहना पसंद किया। मदरसा मंज़र ए इस्लाम के सदर मुफ्ती अकिल रज़वी की मौजूदगी में मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने सबसे पहले कर्बला के शहीदों को खिराज पेश किया। इसके बाद मुफ्ती आज़म हिंद की रूहानी जिदंगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि आप सिलसिलए आलिया कादरिया रजविया के 41 वे पीरे कामिल है। आप बड़े ही फकीह और मुत्तकी(परहेजगार) थे। आपने अपने वालिद आला हज़रत के मिशन पर काम करते हुए मज़हब और सुन्नियत के साथ समाज सुधार के कामों को भी अंजाम दिया। मुफ्ती अय्यूब नूरी व कारी अब्दुर्रहमान क़ादरी ने अपने खिताब में कहा कि शुद्धि आन्दोलन के दौर में मुफ्ती आज़म का अहम रोल रहा है। आपने अपनी जिंदगी में लाखों फतवे लिखे। मुफ्ती सय्यद कफील हाशमी, मौलाना डॉक्टर एजाज़ अंजुम,मौलाना अख्तर,मुफ्ती जमील आदि की भी तकरीर हुई। महशर बरेलवी, आसिम नूरी ने नात – ओ-मनकबत का नजराना पेश किया। देर रात 1 बजकर 40 मिनट पर कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद खुसूसी दुआ की गई। इस मौके पर मुस्तअहसन रज़ा खान, अहसान रज़ा खान, मोअज्जम रज़ा खान, सय्यद मुस्तफा मियां, राशिद अली खान,सय्यद अनवारूल सादात, जुबैर रज़ा खान, नाजिम रज़ा, टीटीएस के शाहिद खान नूरी, नासिर कुरैशी, औररंगज़ेब नूरी,अजमल नूरी, ताहिर अल्वी, परवेज़ नूरी, हाजी जावेद खान,शान रज़ा,मंजूर रज़ा, मुजाहिद रज़ा, डाक्टर अब्दुल माजिद, आलेनबी,इशरत नूरी, ज़ुहैब रज़ा,अश्मीर रज़ा, सबलू अल्वी,आरिफ अल्वी, साकिब रज़ा, रोमान खान,सुहैल रज़ा, अरबाज रज़ा,हाजी शकील,गौहर खान, मोहसिन रज़ा,अजमल रज़ा, समी खान,हाजी अब्बास,युनूस गद्दी, इरशाद रजवी,हाजी शारिक नूरी,तारिक सईद, साजिद नूरी, मुस्तकीम नूरी, काशिफ सुब्हानी, सय्यद माजिद, सय्यद एजाज़, शाद रज़ा, जुनैद मिर्जा, गजाली रज़ा ने संभाली।।

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