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नाले निर्माण मे बरती जा रही भारी अनियमितताएं, मानक विहीन सामग्री लगा कर किया जा रहा निर्माण

आपसी मिलीभगत से हो रहा सरकारी धनराशि का दुरुपयोग, भरी जा रही अपनी अपनी जेबे

संवाददाता लोकतंत्र एक्सप्रेस 

 

रामपुर। एक ओर योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर प्रभावी जोर देते हुए भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने पर लगी है तो वही कुछ ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारी सरकार की नीतियों पर पलीता लगाने का कार्य बडी अच्छी तरीके से कर रहे है। जो योगी सरकार के मंसूबों पर पानी फेरने जैसा है। एक ओर योगी सरकार लगातार उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की मुहिम मे प्रयासरत है तथा जन समस्याओं के समाधान तथा शहर से लेकर गांवों तक के विकास को ध्यान मे रखते हुए कार्य कर रही है। एक ओर सरकार हर शहर को मॉर्डन शहर बनाने मे लगी है। तथा सरकार के मंशा के अनुरूप प्रशासन भी विकसित भारत विकसित रामपुर का नारा दे रहा है तो वही दूसरी ओर विकासशील रामपुर के विकास कार्यों मे भारी अनियमितताएं बरती जा रही है। कुछ अधिकारी व ठेकेदार अपने निजी स्वार्थ के कारण सरकार की इस मुहिम मे रोडा़ बनकर सरकार व प्रशासन की छवि को धूमिल करने का कार्य कर रहे है। ऐसा ही एक मामला जनपद के ज्वाला नगर में कराये जा रहे नाले निर्माण का है।जिसके निर्माण कार्य मे मानक विहीन सामग्री का उपयोग करते हुए ठेकेदार के द्वारा भारी अनियमितताएं बरती जा रही है। अपने निजी लाभ को लेकर ठेकेदार के द्वारा नाले निर्माण मे मानक के विपरीत बालू, सीमेंट तथा सरिया का प्रयोग किया गया है तथा नाले की पीसीसी एवं डीपीसी मे भी भारी अनियमितताएं बरती गयी है। मानक अनुसार नाले निर्माण मे 12 एमएम तथा 10 एमएम का सरिया प्रयोग लाया जाता है जिसकी मानक दूरी 6इंच से 8 इंच की होती है। तथा नाले मे नीचे पीसीसी मे 6 इंच से लेकर 8 इंच तक 30 या 40 एमएम की कंकरीट का प्रयोग करते हुए 1:4:8 या 1:5:10 के अनुपात मे मिश्रण प्रयोग किया जाता है। तथा डीपीसी मे भी 25 से 30 एमएम का कंक्रीट का उपयोग कर 1:1.5:3 या 1:2:4 के अनुसार मिश्रण का प्रयोग किया जाता है। इस दौरान उक्त मिश्रण को बनाने के लिए  साफ पानी का  प्रयोग किया जाता है जिससे मिश्रण की गुणवत्त मे कोई कमी नही आती है।

तो वही दूसरी ओर नगर पालिका के जिम्मेवार जेई की भी भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। उनकी घोर लापरवाही के कारण सरकारी धनराशि का ठेकेदार के द्वारा जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। बताते चले कि नगर पालिका के जिस जूनियर इंजीनियर के संरक्षण मे उस नाले का निर्माण कार्य हो रहा है उनके पास नाले के निरीक्षण के लिए भी समय नही है। यह उनकी कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिंह खड़ा करता है तथा आपसी मिलीभगत के ओर इशारा भी करता है। 

नाले निर्माण में तय मानक अनुसार सामग्री का प्रयोग न किये जाने तथा ठेकेदार के द्वारा बरती जा रही अनियमितताओं से सरकार के कोष को चूना लगाते हुए ठेकेदार व जिम्मेदार अपनी अपनी जेबे भरने में लगे हुए है। योगीराज में भी ठेकेदार अधिकारीयों की आपसी मिलीभगत से लाखों रूपये का चूना लगाते हुए सरकारी धनराशि का पूरी तरह से दुरुपयोग कर रहा है।

प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देते हुए कराये जा रहे नाले निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाये तथा खामी मिलने पर संबंधित जिम्मेदारो पर तत्काल कार्यवाही कराते हुए दुरुप्रयोग धनराशि की रिकवरी को आदेशित किया जाये। जिससे सरकारी धनराशि का दुरुपयोग होने से बचाया जा सके।।

 

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