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प्रतिबंधित पेड़ों पर चल रही आरी, लकड़ी ठेकेदार गुड्डू ने रातोंरात काटे आम के पेड़, विभागीय मिलीभगत के आरोप

संवाददाता लोकतंत्र एक्सप्रेस 

 

 बरेली। विशारतगंज क्षेत्र के ग्राम किशनपुर में प्रतिबंधित पेड़ों की अवैध कटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लकड़ी ठेकेदार गुड्डू पर आरोप है कि उसने दिनांक 01.06.26 को रात के अंधेरे का फायदा उठाकर बिना परमिट के प्रतिबंधित आम के पेड़ काट डाले।और प्रतिबंधित लकडी को अवैध तरीके से ट्राली में भरकर फरार हो गया। विभागीय लोगों से जानकारी लेने पर मामला संज्ञान मे नही है। जानकारी होने पर अवगत कराने की बात कही गयी थी। 

विभागीय सांठगांठ से कट गये सैकड़ों प्रतिबंधित पेड़, ना कोई कार्यवाही नाही कोई जुर्माना  

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। क्षेत्र में पिछले कई महीनों से विभागीय मिलीभगत के चलते प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों पर आरी चलाई जा रही है। आम के अलावा शीशम, नीम, गूलर, महुआ, पीपल और पाकड़ जैसे संरक्षित पेड़ों के सैकड़ों जडे़ व ठूंठ अब जंगल और खेतों की शोभा बिगाड़ रहे हैं। जोकि विभागीय सांठगांठ से बड़े पैमाने पर काटे जा रहे है इस कारण आज तक किसी भी लकडी़ ठेकेदार पर ना तो कभी कोई  कार्यवाही होती है और नाही कोई जुर्माना वसूला जाता है। 

आधी बनी वहाना,कट गये खडे़ पेड, ठेकेदार और विभागीय कर्मचारी काट रहे चांदी भर रहे अपनी जेबे 

लकड़ी ठेकेदारों एवं विभागीय जिम्मेदारों को आंधी आना एक बडा़ वहाना मिल गया है। ठेकेदारों ने आंधी मे गिरे पेड़ों के उठाने के साथ साथ मौका लगते ही खडे पेड़ों पर भी कुल्हाड़ी चलाने मे बिल्कुल भी गुरेज नही की। प्रतिबंधित पेड़ों पर लगातार जम कर आरी चल रही है और ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की जेबे भरी जा रही है। सूत्रों ने बताया कि लकड़ी ठेकेदार गुड्डू का नेटवर्क इतना मजबूत है कि प्रतिबंधित पेड़ काटने के बाद लकड़ी रातोंरात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से ठिकाने लगा दी जाती है। सवाल उठता है कि जब बिना परमिट के एक पत्ता भी काटना अपराध है, तो सैकड़ों पेड़ कैसे गायब हो गए?  

जानकारी देने पर भड़का ठेकेदार,तुमको जो भी करना है कर लो सब कुछ है सैट 

 लकडी ठेकेदार गुड्डू से जानकारी लेने पर तो वह आग-बबूला हो गया और धमकाने पर उतर आया। चोरी पर चोरी ऊपर से सीना जोरी वाली कहावत को चरितार्थ करता लकड़ी ठेकेदार, उसकी इस तरह की प्रवृत्ति से जगजाहिर हो रहा है कि उसकी सेटिंग ऊपर तक है, और उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”  

वन विभाग बेखबर या जानबूझकर बना अनजान? 

हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही अवैध कटाई की भनक तक वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है। वन अधिनियम के तहत आम, नीम, शीशम, महुआ, पीपल ,पाकड़ जैसी प्रजातियों को बिना अनुमति काटना दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माने के साथ साथ  जेल तक जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद विशारतगंज क्षेत्र के  किशनपुर समेत आसपास के गांवों में हरे -भरे पेड़ लगातार कम हो रहे हैं।  

क्षेत्रवासियों  ने बताया कि, “पहले गांव के चारों तरफ हरियाली थी। अब जहां देखो ठूंठ ही ठूंठ जड़े ही जडे़ नजर आती हैं। गर्मी से बुरा हाल है। विभागीय अधिकारियों को सब पता है मगर फिर भी जानबूझकर कर अंजान बने हुए है ।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग  

जिलाधिकारी और डीएफओ से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराते हुए अवैध कटाई में शामिल ठेकेदार और मिलीभगत करने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाये, ताकि पर्यावरण को और नुकसान न पहुंचे।  

फिलहाल वन विभाग के अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। देखना होगा कि खबर सामने आने के बाद प्रशासन नींद से जागता है या नहीं।

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